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देश का किसान है अस्त दो देश के अर्थव्यवस्था कैसी रहे गी मस्त।

वर्ष 2016 भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बहुत दर्दनाक था।देश के अन्नदाता के लिए 2016 बहुत ही दिल हिला देने वाला था.राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने शुक्रवार को घोषणा की कि 2016 में भारत में 11,379 किसानों ने आत्महत्या की। NCRB ने 2016 के अपने नए एक्सीडेंटल डेथ एंड सुसाइड रिकॉर्ड में कहा है कि हर महीने 948 किसान आत्महत्या करते हैं, या हर दिन 31 आत्महत्याएं होती हैं। अंतिम रिपोर्ट 2015 में जारी की गई थी। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 2016 में देश में किसानों की आत्महत्याओं की संख्या 11,379 थी जो 2014 में 12,360 और 2015 में 12,602 थी।

रिपोर्ट बताती है कि यद्यपि महाराष्ट्र ने पिछले वर्ष से 20% की गिरावट देखी, यह 6,270 किसानों की आत्महत्याओं के साथ देश भर में 2,550 के साथ प्रमुख राज्य बना रहा।कुल मिलाकर, डेटा संकेत देता है कि किसान आत्महत्याओं में लगभग 21% की गिरावट आई है, जबकि खेत मजदूरों में 10% की वृद्धि हुई है।

NCRB की रिपोर्ट यह भी कहती है कि भारत में आत्महत्या से मरने वाले किसानों में से अधिकांश पुरुष थे, जबकि महिलाओं ने देश में केवल 8.6% किसानों की आत्महत्याओं पर विचार किया।हालाँकि, रिपोर्ट में उक्त किसान आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। इसके विपरीत, एनसीआरबी ने अपनी पहले की रिपोर्ट में किसानों की आत्महत्याओं को फसलों की विफलता, बीमारी, पारिवारिक समस्याओं और ऋण आदि जैसे वर्गों के तहत वर्गीकृत करने के पीछे कारण बताए थे।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं हुईं।

कर्नाटक ने 2016 में 2,079 पर किसानों की आत्महत्याओं की दूसरी संख्या दर्ज की, जबकि 2015 में 1,569 थी। इस बीच, तेलंगाना में, 2016 में किसान आत्महत्याओं की संख्या 645 से अधिक थी, जबकि 2014 में 1,347 और 2015 में 1,400 थी। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल ने 2016 के लिए किसान आत्महत्याओं पर डेटा प्रदान नहीं किया। राज्य ने 2015 में कोई संख्या जारी नहीं की थी। इसने 2014 में 230 आत्महत्याओं की सूचना दी थी।

यह रिपोर्ट बहुत ही परेशान करने वाली है कि देश का अन्न दाता कितनी मुश्किलो से गुज़र रहा था ,और आज भी गुजर रहा है. सरकारे आती है और चली जाते है. पर हमारे देश का किसान आज़ादी के 70 साल भी अपने आपको विकसित नहीं कर पाया,किसान जब हर बार अपने खेतमे फसल उगाने के लिए बीज होता होगा ये ज़रूर सोचता होगा की इस बार तो मेरे अचे दिन अहि जायेगे।.कर्ज में डूबा किसान सोचता होगा की इस बार तो सारा लोन माफ़ पर बोझ डूबा किसान क्या जाने उप्पर वाले को तो कुछ और ही सोचता है. एक बार सोचियेगा ज़रूर अगर देश का किसान है अस्त दो देश के अर्थव्यस्था कैसे रहे गी मस्त।

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