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हरियाणा और महाराष्ट्र में उम्मीद के मुताबिक कमल क्यों नहीं खिला।

By India Business Story 

हरियाणा में जीतने के बावजूद बीजेपी इस बार हार की तरफ दिख रही है, क्योंकि उन्होंने नारा दिया है अबकी बार 75 बराबर।

बीजेपी इस चुनाव से क्या सीख सकती है, ऐसे लोगों को टिकट दे रही है जिनके पास कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है जैसे कि बबीता फोगट वह खेल व्यक्तित्व हैं, लेकिन हरियाणा में उनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है और एक अन्य सोनाली फोगट फिर से वह भी नहीं हैं किसी भी राजनीतिक इतिहास में टिक टोक की प्रसिद्धि एकमात्र मुख्य कारण है कि भाजपा आलाकमान ने उन्हें टिकट दिया। सोशल मीडिया स्टार या स्पोर्ट्स होने से पार्टी किसी भी विधानसभा चुनाव को जीतने में मदद नहीं कर सकती है।

  • IBS संवाददाता ने हरियाणा के लोगों से बात की जब वह चुनाव कवर कर रहे थे, हरियाणा के जाटों ने हमें बताया कि वे खट्टर सरकार के खिलाफ हैं, हमारे संवाददाता ने उनसे पूछा कि लोगों ने हमें क्यों बताया कि हम मोदी सरकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हम हैं हरियाणा में भाजपा सरकार से पूरी तरह संतुष्ट नहीं।
  • अब बात करते हैं कि कांग्रेस ने हरियाणा में क्यों कड़ी लड़ाई दी है।

मीडिया विशेषज्ञ बात कर रहे थे कि कांग्रेस हरियाणा में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को कड़ी टक्कर नहीं देगी, लेकिन जब भारतीय मीडिया चैनलों ने एग्जिट पोल पेश किया कि भाजपा भारी अंतर से जीतेगी।

  • लेकिन भूपिंद्र सिंह के नेतृत्व में हुड्डा हैं और कुमारी सेलेजा ने हरियाणा के विधान सभा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है क्योंकि कांग्रेस जीत की स्थिति में है। इस चुनाव में कांग्रेस ने उस मुद्दे का अनुसरण किया है जो हरियाणा के लोगों का है।
  • लेकिन हमें जेजेपी (जननायक जनता पार्टी) को नहीं भूलना चाहिए, पार्टी के संस्थापक दुष्यंत चौटाला हैं, जेजेपी इस विधानसभा चुनाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, कई अटकलें हैं कि जेजेपी इस बार हरियाणा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • महाराष्ट्र के परिणाम बीजेपी के लिए चिंताजनक क्यों है.
  • बीजेपी और शिवसेना गठबंधन के पास अब बहुमत है, जिससे स्पष्ट है कि वे राज्य में सरकार बना रहे हैं, लेकिन 2014 के विधानसभा चुनावों की तुलना में बीजेपी को 18 सीटों का नुकसान हो रहा है, लेकिन शिवसेना ने 2019 में अपने प्रदर्शन को दोहराया है।
  • 2 बिंदु यह है कि महाराष्ट्र के लोगों ने भाजपा और शिवसेना गठबंधन को दूसरा मौका क्यों दिया।महाराष्ट्र चुनाव परिणाम: “50:50 विधि को पूरा करने का समय”: उद्धव ठाकरे ‘जब अमित शाह मेरे घर (लोकसभा चुनाव से पहले) आए तो हमने उन्हें स्पेसिफिकेशन दिए। अब पूरा करने का समय है, ”उद्धव ठाकरे ने कहा।
  • कही न लगता है की बीजेपी और शिवसेना में मुख्य मंत्री पद क लिए पैच फस सकता है। दूसरी बात येह भी है कि महारष्ट्र की जनता ने राजिए को एक मज़बूत विपक्ष दिया है जो के लोकतंत्र के अछि खबर है। इसे के साथ ये भी कहेना गलत नहीं होगा बीजेपी के लिए प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ही संजीवनी बूटी का काम करते है।
  • इस चुनाव को बीजेपी की जीत से बढ़कर, इन चुनावों को एक दूसरे रूप से देखना चाइय विपक्ष की हिंदुस्तान की राजनीती वापसी हुई है जो विपक्ष आजसे 5 महीने पहले लोक सभा चुनाव में गुम हो गया था जिसका नेशनल इलेक्शन में बूरी मोदी लहर ने सफाया किया था। पर इन दो रजियो के परिणामो में दिखा है कि विपक्ष अभी जिन्दा है।

एक बात ये भी है के बीजेपी पर राष्ट्रवाद की राजनीती भारी पढ़ी है ?

बीजेपी हर बड़ा नेता राष्ट्रवाद और धारा 370 का खूब प्रचार किआ जो कि बीजेपी को थोड़ा नुकसान ज़रूर पोचाया है , यह बीजेपी की लिए भी एक सबक है की जबतक जमीन जुड़े मुद्दे नहीं उठाये गे जैसे नौकरी ,बेजरोजगारी जनता आपै नहीं जुड़ेगी हर बार राष्ट्रवाद ही जीत की चाबी नहीं होगी.

इंडिया बिज़नेस स्टोरी हरियाणा और महाराष्ट्र की जनता के दिए गए परिणामो का सामान करता है. अब ये अयास लगाए जारे है की बीजेपी हरियाणा में जोड़ तोड़ कर सरकार बना सकती है।

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